Source/Author: Rishiraj Mistry |
Posted on: August 17th, 2010
Superb portrayal of the typical social attitudes towards issues of domestic violence. DV is NOT gender specific… Anyone and everyone can be a victim of DV in home, every human being in a domestic relationship deserves protection against the perpetrator!
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Posted on: February 3rd, 2010
By पूनम पांडे
महिला अधिकारों की जब बात उठती है तो महिलाएं क्या मांगती हैं? जाहिर है बराबरी का अधिकार। लेकिन अगर बराबरी की मांग करते-करते कोई खुद शोषणकारी की तरह बर्ताव करने लगे तो…. कम से कम कुछ मामलों में तो यही हो रहा है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि अभी भी कई जगह खासकर गांवों में महिलाओं की स्थिति बहुत दयनीय है और उन्हें उनके अधिकार दिलाने के लिए जितना भी किया जाए वह कम है लेकिन ऐसी महिलाओं की संख्या भी बढ़ रही है जो अपने हक के लिए मिले कानून का दुरूपयोग कर रही हैं। और कानून भी इसमें मूकदर्शक बने रहने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहा है।
मेरा एक मित्र है जिसने कुछ दिनों पत्रकारिता की और अब लॉ करने के बाद एक सीनियर क्रिमिनल लॉयर के साथ ट्रेनिंग ले रहा है। कुछ ही दिन पहले वह मिला और इतना व्यथित था कि पूछिए मत। वजह पूछने पर बताया कि यार गलत काम मैं कर नहीं सकता और न करूं तो वकालत करने का सपना छोड़ना पड़ेगा। और मेरे पैरंट्स मुझे समझने की बजाय मुझे प्रैक्टिकल बनने की सलाह दे रहे हैं। हुआ यूं कि कुछ दिन पहले उसके सीनियर के पास एक महिला आई। पढ़ी लिखी और मॉडर्न। उसने अपने 2 साल पुराने पति और उसके पैरंट्स के खिलाफ घरेलू हिंसा कानून के तहत केस दर्ज कराया था। वह वकील से कहने लगी कि मैं अपने पति और उसके पूरे परिवार को जेल में देखना चाहती हूं चाहे इसके लिए कुछ भी करना पड़े। आप चाहें तो सबूत क्रिएट करने के लिए मैं अपने शरीर पर सिगरेट से दागने के निशान बना सकती हूं। इतना बताया ही था कि मेरा वह दोस्त बुरी तरह बरस पड़ा। उसने बताया कि एक हफ्ते से वह सीनियर लॉयर के पास नहीं गया है क्योंकि जब उसने उनसे कहा कि सर ये तो गलत है तो उन्होंने उसे ही लेक्चर दे डाला।
एक वाकया और याद आ रहा है जब मैं कॉलेज में स्टूडेंट यूनियन में थी। एक 22 साल के लड़के को रेप के आरोप में गिरफ्तार किया गया। कुछ सीनियर पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दरअसल मामला कुछ और ही है। वह लड़का एक कॉल गर्ल के पास गया और बाद में पैसों को लेकर कुछ बहस हुई और 40 रुपये को लेकर उसने लड़के पर रेप का केस कर दिया। मेडिकल टेस्ट में भी उसकी पुष्टि हो गई। पुलिस वाले हकीकत जानते हुए भी कुछ नहीं कर सके और उस लड़के को सजा हो गई।
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Posted on: October 30th, 2009
Do you really believe your kids have a better future with your abusive wife? What future of your kids do you expect stying with a woman who’s but an abusive mother? [...]
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Posted on: October 23rd, 2009
Reading the article “Good or Bad, Hard to Say!” suddenly struck a chord with me regarding the deteriorating status quo of the institution of marriage in India and its fatal repercussions on men. Marriage, at least in India, has always been projected as “Tumultuous for women and blissful for men”. However, perceptions are seldom reality.
This has led to a social meme that when a marriage breaks, it does not affect the man and thus men are offered no protection from failed marriages the way women are offered. However, what a man goes through in a bad marriage can be understood either by the victim himself or men’s rights activists who understand a man’s pain.
Most men in broken marriages sulk in silence; feign a plastic smile to tell everyone, “I am fine.” While many unfortunate ones commit suicide as elucidated from the below 2 articles,
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